नकाब मे निकली….

घर से बाहर कोलेज जाने के लिए वो नकाब मे निकली….
सारी गली उनके पीछे निकली…

इनकार करते थे वो हमारी मोहबत से……….
और हमारी ही तसवीर उनकी किताब से निकली………

कोई न कोई रोया…

कोई खुशियों की चाह में रोया
कोई दुखों की पनाह में रोया..
अजीब सिलसिला हैं ये ज़िंदगी का..
कोई भरोसे के लिए रोया..
कोई भरोसा कर के रोया..

वक्त…..

वक्त बदल जाता है जिंदगी के साथ
जिंदगी बदल जाती है वक्त के साथ

वक्त नहीं बदलता दोस्तों के साथ
बस दोस्त बदल जाते हैं वक्त के साथ…

bewafai

उस जैसा मोती पूरे समंद्र में नही है,
वो चीज़ माँग रहा हूँ जो मुक़्दर मे नही है,

किस्मत का लिखा तो मिल जाएगा मेरे ख़ुदा,
वो चीज़ अदा कर जो किस्मत में नही है…

कैसे जिओगे…

गुलाम बनकर जिओगे तो.
कुत्ता समजकर लात मारेगी तुम्हे ये दुनिया

नवाब बनकर जिओगे तो,
सलाम ठोकेगी ये दुनिया….

“दम” कपड़ो में नहीं,
जिगर में रखो….

बात अगर कपड़ो में होती तो, सफ़ेद कफ़न में,
लिपटा हुआ मुर्दा भी “सुल्तान मिर्ज़ा” होता.