ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं जबतक मोहब्बत होती नही
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं जबतक मोहब्बत होती नही
मोहब्बत मोहब्बत नही जब तक हसा कर रुला देती नही
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं जबतक मोहब्बत होती नही
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं जबतक मोहब्बत होती नही
मोहब्बत मोहब्बत नही जब तक हसा कर रुला देती नही
ख्वाइस तो यही है कि तेरे बाँहों में पनाह मिल जाये |
शमा खामोस हो जाये और शाम ढल जाये ||
प्यार इतना करे कि इतिहास बन जाये |
और तुम्हारी बाँहों से हटने से पहले शाम हो जाये ||

उनका भी कभी हम दीदार करते है
उनसे भी कभी हम प्यार करते है
क्या करे जो उनको हमारी जरुरत न थी
पर फिर भी हम उनका इंतज़ार करते है !
जीवन स्वयं व्यापार बना हैं
मोल – तोल का भाव बना हैं
क्रय – विक्रय जो करना चाहो
इसके वास्ते संसार बना हैं
फिर भी कुछ अनमोल है इसमें
जिसका कोई मोल नहीं
भक्त की भक्ती हो
हो साकी की हाला
दाम से नही मिलती
सम्मान से मिलती मधुशाला।
दिल से निकली हे दुआ हमारी
जिन्दगी में मिले आपको खुशिया
गम न दे खुदा आपको कभी
चाहे तो एक ख़ुशी कम कर ले हमारी
