जेब में ईमान रखते हैं

दिलों में खुंदक, चेहरों पर मुस्कान रखते हैं
वो नज़रों से छुपा कर, तीर कमान रखते हैं
मौका मिलते ही उतार देते हैं तीर दिल में,
ग़ज़ब है कि फिर भी, वो शीरी ज़ुबान रखते हैं
कैसा ये शहर यहां हर तरफ यही शोर है, कि
यहाँ के लोग अपनी जेबों में, ईमान रखते हैं
किसी भूखे को एक निबाला न दे सके कभी,
फिर भी ज़न्नत पाने का, वो अरमान रखते हैं

शांती स्वरूप मिश्र

गमो मे हँसने …

गमो मे हँसने वालो को भुलाया नही जाता,
पानी को लहरो से हटाया नही जाता,
बनने वाले बन जाते है,
अपने कहकर किसी को अपना बनाया नही जाता ।