Mehta

आज़ाद हैं तोह आसमान छु ही आएंगे
ज़िंदा है तो हर जंग जीत जायेंगे

साथ हैं हम तो दुनिया को दिखा आएंगे
तिरंगे के तीन रंगों में देश को समा जायेंगे

कफ़न…

मौत एक सच्चाई है उसमे कोई ऐब नहीं
क्या लेके जाओगे यारों कफ़न में कोई जेब नहीं

एब = weakness


मनोज डिजिटल

आँखों से….

आँखों से बरसात होती हैं
जब आपकी याद साथ होती है,
जब भी busy रहे मेरा cell
तो समझ लेना
आपकी होने वाली भाभी से मेरी बात होती हैं

नकाब मे निकली….

घर से बाहर कोलेज जाने के लिए वो नकाब मे निकली….
सारी गली उनके पीछे निकली…

इनकार करते थे वो हमारी मोहबत से……….
और हमारी ही तसवीर उनकी किताब से निकली………

कोई न कोई रोया…

कोई खुशियों की चाह में रोया
कोई दुखों की पनाह में रोया..
अजीब सिलसिला हैं ये ज़िंदगी का..
कोई भरोसे के लिए रोया..
कोई भरोसा कर के रोया..