अजीब ज़ुल्म…

जिस हॉस्पिटल के हम डॉक्टर हैं,
हमारी पत्नी वहा की नर्स हैं
क्या अजीब ज़ुल्म सहना पड़ता हैं
अपनी ही बीवी को सिस्टर कहना पड़ता हें

दोस्ती और इश्क़

इश्क ओर दोस्ती मेरे दो जहान है,
इश्क मेरी रुह, तो दोस्ती मेरा ईमान है,
इश्क पर तो फिदा करदु अपनी पुरी जिंदगी,
पर दोस्ती पर, मेरा इश्क भी कुर्बान है

friendship

दिल मे एक शोर सा हो रहा है.
बिन आप के दिल बोर हो रहा है.

बहुत कम याद करते हो आप हमे.
कही ऐसा तो नही की…

ये दोस्ती का रिस्ता कंज़ोर हो रा है.

रिज़वान…

माना के किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही….
पर ये सच ह के मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही,

उस के दिल मे, उसकी यादो मे कोई और है लेकिन,
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही..

है ये सफर लंबा ही सही , मिलते रहे हम , हमेशा ,ऐ बेहना….

है ये सफर लंबा ही सही , मिलते रहे हम , हमेशा ,ऐ बेहना…………..
तेरी भी दुआएं सफर में शामिल रहें, ऐ बेहना , ………….
होगयी बिदा तू ,ऐ बेहना , ……………
फिर भी हर सुख – दुःख में वो साथ रही ,ऐ बेहना , …………..
हर लम्हा। हर पल मिलती रहे खुशियाँ तुझे , ऐ बेहना , ………………
दुआएं मेरी भी ये ही रही तुझे , ऐ बेहना , …………….
है ये सफर लंबा ही सही , मिलते रहे हम , हमेशा ,ऐ बेहना………………
देता रहूँ तुझे हमेसा , जो तू चाहे ,ऐ बेहना , ………………..
बांधा है तूने हर दुआओं का बंधन इस राखी में , ऐ बेहना , ……………
अर्ज है इतनी सी उस खुदा से , ऐ बेहना………….
है ये सफर लंबा ही सही , मिलते रहे हम , हमेशा ,ऐ बेहना………….
रहूँ दूर तुझसे भले ही सही , असर है दुआओं में तेरी , ऐ बेहना……………
है ये सफर लंबा ही सही , मिलते रहे हम , हमेशा ,ऐ बेहना………………..